Question:easy

'श्लेष' अथवा 'उत्प्रेक्षा' अलंकार का लक्षणसहित एक उदाहरण लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: चुना गया अलंकार:
विकल्प में श्लेष और उत्प्रेक्षा हैं। इस समाधान में दूसरा अलंकार 'उत्प्रेक्षा' लिखा गया है।

चरण 2: परिभाषा:
जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। यहाँ कवि पक्का नहीं कहता कि यह वही है, वह केवल अनुमान करता है कि मानो ऐसा हो।
पहचान के शब्द: मानो, जानो, मनु, जनु, मनहुँ, जनहुँ, ज्यों आदि।

चरण 3: उदाहरण:
सोहत ओढ़े पीत पट, स्याम सलोने गात।
मनहुँ नीलमनि सैल पर, आतप पर्यो प्रभात॥

चरण 4: स्पष्टीकरण:
बिहारी की इस पंक्ति में पीला वस्त्र पहने साँवले कृष्ण उपमेय हैं। उनमें नीलमणि पर्वत पर सुबह की धूप पड़ने की सम्भावना की गई है। 'मनहुँ' वाचक शब्द है और कल्पना साफ दिखती है, इसलिए यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।

अंतिम उत्तर:
उपमेय में उपमान की सम्भावना होने पर उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
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