चरण 1: लिखने की योजना:
भूमिका, मुझे यह खेल क्यों भाता है, खेलने की विधि, इस खेल से मिली सीख, खेल और पढ़ाई का संतुलन, समापन।
चरण 2: निबन्ध: मेरा प्रिय खेल:
भूमिका
मनुष्य के लिए भोजन और नींद जितना ही आवश्यक खेलना भी है। खेल से तन स्वस्थ रहता है और मन प्रसन्न। मैंने कई खेल खेले हैं, किन्तु क्रिकेट से मेरा लगाव सबसे गहरा है।
मुझे यह खेल क्यों भाता है
क्रिकेट में हर गेंद के साथ स्थिति बदल जाती है। कभी छक्का लगता है, कभी विकेट गिरता है। अन्तिम गेंद तक परिणाम अनिश्चित रहता है, यही इसका रोमांच है। भारत में इसके करोड़ों प्रशंसक हैं। 1983 का विश्वकप, 2007 का टी-20 विश्वकप और 2011 का विश्वकप आज भी लोगों को गर्व से भर देते हैं। सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया, यह इस खेल का बड़ा गौरव है।
खेलने की विधि
दो टीमें आमने-सामने होती हैं और प्रत्येक में ग्यारह खिलाड़ी रहते हैं। पिच के दोनों ओर विकेट गड़े होते हैं। गेंदबाज गेंद फेंकता है, बल्लेबाज उसे खेलकर रन बनाता है और क्षेत्ररक्षक उसे रोकने का प्रयास करते हैं। निश्चित ओवरों में जिस टीम के रन अधिक होते हैं, वही जीतती है।
इस खेल से मिली सीख
क्रिकेट ने मुझे धैर्य सिखाया है, क्योंकि अच्छा बल्लेबाज सही गेंद की प्रतीक्षा करता है। इसने मुझे टीम भावना दी है, क्योंकि यहाँ अकेला खिलाड़ी मैच नहीं जिताता। पंचों का निर्णय मानना अनुशासन सिखाता है। हारने पर निराश न होकर फिर प्रयास करना भी इसी खेल से आता है।
खेल और पढ़ाई का संतुलन
मैं रोज सुबह या शाम एक घण्टा अभ्यास करता हूँ और शेष समय पढ़ाई को देता हूँ। इस प्रकार दोनों में तालमेल बना रहता है। खेल के समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी आवश्यक है।
समापन
क्रिकेट मेरे लिए केवल समय बिताने का साधन नहीं, जीवन की पाठशाला है। यह मुझे स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वासी बनाता है।
निष्कर्ष:
यह निबन्ध क्रिकेट को आधार बनाकर लिखा गया है। कोई भी अन्य खेल चुनने पर इसी क्रम में उसके नियम, लाभ और अपने अनुभव लिखे जा सकते हैं।