चरण 1: शब्द की व्युत्पत्ति:
संस्कृत में नीर का अर्थ जल है और ज का अर्थ जन्मा हुआ। अतः नीरज का शाब्दिक अर्थ है जल से उत्पन्न। इसी आधार पर दो अलग अर्थ बने।
चरण 2: दो अर्थ और उदाहरण:
पहला अर्थ: मुक्ता या मोती। उदाहरण: सीप से निकला नीरज बहुमूल्य होता है।
दूसरा अर्थ: पंकज या कमल का फूल। उदाहरण: कीचड़ में रहकर भी नीरज निर्मल रहता है।
चरण 3: ध्यान रखें:
नीरज के पर्यायवाची कमल, पंकज, अम्बुज और जलज हैं। यह पुरुषों का नाम भी है।
अंतिम उत्तर:
नीरज = (1) मोती, (2) कमल।