चरण 1: निबन्ध का ढाँचा:
1. भूमिका
2. आतंकवाद: स्वरूप और पहचान
3. आतंकवाद की जड़ें
4. समाज पर प्रभाव
5. समाधान के मार्ग
6. समापन
चरण 2: निबन्ध: आतंकवाद, एक वैश्विक चुनौती:
भूमिका: शांति मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है, पर आतंकवाद उसी शांति को नष्ट करता है। आज कोई देश स्वयं को पूरी तरह सुरक्षित नहीं कह सकता। बाज़ार, रेलगाड़ी, मंदिर या स्कूल, कहीं भी आतंक का साया पड़ सकता है।
स्वरूप और पहचान: आतंकवाद वह हिंसक गतिविधि है जिसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर भय पैदा किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकार या समाज पर दबाव डालकर अपनी बात मनवाना होता है। आतंकवादी संगठन गुप्त रूप से काम करते हैं और धर्म या विचारधारा की आड़ लेते हैं।
आतंकवाद की जड़ें: इसकी जड़ में गलत शिक्षा और कट्टर विचार हैं, जो युवाओं के मन में घृणा भर देते हैं। बेरोज़गारी और निर्धनता के कारण कुछ लोग पैसे के लालच में गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं। दूसरे देशों से मिलने वाली आर्थिक और सैन्य सहायता इसे बल देती है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग से भी भ्रामक प्रचार तेज़ी से फैलता है।
समाज पर प्रभाव: भारत ने मुंबई हमले और पुलवामा जैसी घटनाओं में अपने अनेक वीर सपूत और निर्दोष नागरिक खोए हैं। आतंकवाद से आम आदमी का विश्वास टूटता है। विकास की योजनाएँ रुक जाती हैं और विदेशी निवेश घटता है। बच्चों और महिलाओं के मन पर गहरा मानसिक आघात पड़ता है।
समाधान के मार्ग: पहला उपाय है मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था और सतर्क खुफिया सेवा। दूसरा, आतंकवादियों के धन के स्रोत बंद किए जाएँ और उन पर तुरंत कार्रवाई हो। तीसरा, शिक्षा में नैतिक मूल्यों और मानवता का पाठ पढ़ाया जाए। चौथा, युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाए जाएँ। पाँचवाँ, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर सभी देश मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध एक नीति बनाएँ। मीडिया भी संयम रखे और अफवाहें न फैलाए।
समापन: आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई लंबी है, किन्तु असंभव नहीं है। यदि हम सजग रहें, आपसी प्रेम बनाए रखें और अपने बच्चों को सही दिशा दें, तो कोई ताकत हमारे समाज को बाँट नहीं सकती।
निष्कर्ष:
सजग नागरिक, मज़बूत शासन और विश्व-सहयोग से ही आतंकवाद पर विजय मिल सकती है।