चरण 1: निबन्ध की रूपरेखा:
भूमिका, प्राचीन काल में वृक्षों का स्थान, वृक्षों से मिलने वाले लाभ, चिपको आन्दोलन की प्रेरणा, वृक्षारोपण कैसे करें, उपसंहार।
चरण 2: निबन्ध:
भूमिका
प्रकृति ने मनुष्य को अनेक वरदान दिए हैं, जिनमें वृक्ष सबसे अनमोल हैं। पेड़ों के बिना धरती की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए आज के समय में जीवन के लिए वृक्षारोपण अत्यन्त आवश्यक हो गया है।
प्राचीन काल में वृक्षों का स्थान
भारत में पीपल, तुलसी, वट और आँवला जैसे वृक्षों की पूजा की जाती रही है। हमारे ऋषि-मुनि वनों में आश्रम बनाकर रहते थे। एक श्लोक में कहा गया है: दशकूपसमा वापी दशवापीसमो ह्रदः, दशह्रदसमः पुत्रो दशपुत्रसमो द्रुमः। अर्थात एक वृक्ष का महत्व दस पुत्रों के बराबर है।
वृक्षों से मिलने वाले लाभ
वृक्ष वायु को शुद्ध करते हैं और गर्मी में ठण्डी छाया देते हैं। ये वर्षा कराने में सहायक होते हैं। इनके फल और सब्जियाँ हमारा भोजन हैं। नीम, तुलसी, अर्जुन जैसे पेड़ों से अनेक औषधियाँ बनती हैं। पेड़ों की जड़ें भूमिगत जल को बढ़ाती हैं और मिट्टी का कटाव रोकती हैं। वृक्षों से हमें फर्नीचर के लिए लकड़ी और उद्योगों के लिए कच्चा माल भी मिलता है।
चिपको आन्दोलन की प्रेरणा
सन् 1973 में उत्तराखण्ड के चमोली क्षेत्र में ग्रामीण स्त्रियाँ पेड़ों से लिपट गईं, ताकि उन्हें काटा न जा सके। यह चिपको आन्दोलन कहलाया। सुन्दरलाल बहुगुणा जैसे पर्यावरण-प्रेमियों ने इसे आगे बढ़ाया। यह आन्दोलन बताता है कि वृक्षों की रक्षा जन-सहयोग से ही सम्भव है।
वृक्षारोपण कैसे करें
वर्षा ऋतु पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय है। स्थान के अनुसार नीम, पीपल, आम, शीशम जैसे उपयोगी पौधे चुनने चाहिए। गड्ढा खोदकर पौधा लगाएँ, उसकी नियमित सिंचाई करें और पशुओं से बचाने के लिए घेरा बनाएँ। स्कूल, कॉलेज और गाँव की पंचायतें मिलकर सामूहिक अभियान चला सकती हैं।
उपसंहार
जो व्यक्ति एक पेड़ लगाता है, वह आने वाली पीढ़ियों को उपहार देता है। यदि हम सब हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाएँ और उसे बड़ा करें, तो धरती फिर से हरी-भरी हो जाएगी।
निष्कर्ष:
वृक्षारोपण जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण तीनों की रक्षा का सबसे सरल उपाय है।