चरण 1: निबन्ध का ढाँचा:
(क) भूमिका
(ख) पुरानी व्यवस्था की कमियाँ और नई नीति की आवश्यकता
(ग) नीति के लाभ
(घ) नीति की कमजोरियाँ
(ङ) आगे का मार्ग
चरण 2: निबन्ध:
भूमिका
शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान ही नहीं, जीवन जीने की समझ भी देती है। जब देश की जरूरतें और दुनिया का स्वरूप बदल जाए, तो पुरानी शिक्षा-नीति काम नहीं आती। इसी विचार से वर्ष 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति सामने आई।
पुरानी व्यवस्था की कमियाँ और नई नीति की आवश्यकता
पहले की प्रणाली में परीक्षा और अंकों का दबाव बहुत अधिक था। विद्यार्थी विषय को समझने के बजाय रटकर उत्तीर्ण होने का प्रयास करते थे। पढ़ाई और रोजगार के कौशल के बीच दूरी थी। इसी कारण एक ऐसी नीति की आवश्यकता महसूस हुई जो सोचने की क्षमता और हुनर को बढ़ाए।
नीति के लाभ
पहला लाभ यह है कि पाँच वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा को भी व्यवस्थित ढाँचे में लाया गया है। दूसरा, प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में पढ़ाई से बच्चे का आधार मजबूत होता है। तीसरा, विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार विषय चुन सकता है। चौथा, स्कूल स्तर से ही व्यावसायिक प्रशिक्षण मिलने से रोजगार की तैयारी जल्दी शुरू होती है। पाँचवाँ, कॉलेज में पढ़ाई बीच में छोड़ने पर भी उसके अंक सुरक्षित रहते हैं और आगे जोड़े जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त मूल्यांकन को केवल परीक्षा तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष के प्रदर्शन से जोड़ने की बात कही गई है।
नीति की कमजोरियाँ
सबसे बड़ी चिन्ता संसाधनों की है। हमारे अनेक सरकारी विद्यालयों में शिक्षक, भवन और शौचालय जैसी सामान्य सुविधाएँ भी पूरी नहीं हैं। तीन भाषाएँ सीखने का बोझ बच्चों पर पड़ सकता है और कुछ राज्य इसे अपनी भाषा पर दबाव मानते हैं। निजी और विदेशी संस्थानों के आने से शिक्षा महँगी होने का भय भी जताया जाता है।
आगे का मार्ग
नीति तभी सफल होगी जब केन्द्र और राज्य मिलकर काम करें। शिक्षकों को सम्मान, प्रशिक्षण और उचित वेतन मिले तथा गरीब विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति और डिजिटल साधन उपलब्ध कराए जाएँ।
उपसंहार
नई शिक्षा नीति में अनेक अच्छे विचार हैं, पर उनका मूल्य तभी है जब वे कक्षा तक पहुँचें। सही क्रियान्वयन से यह नीति आने वाली पीढ़ी को सक्षम और आत्मनिर्भर बना सकती है।
निष्कर्ष:
इस निबन्ध में गुण और दोष दोनों को अलग-अलग शीर्षकों में रखकर विषय की माँग पूरी की गई है।