Concept:
- बहुव्रीहि और द्विगु में अंतर पहचानने की कसौटी यह है कि विग्रह में ‘जिसके’, ‘जिसका’, ‘वह’ जैसे शब्द आते हैं या नहीं।
- यदि विग्रह के अंत में ‘वह’ या किसी का नाम आए, तो समास बहुव्रीहि है।
Step 1: पहले द्विगु की संभावना जाँचिए।
पद में ‘पंच’ अर्थात संख्या है, इसलिए पहली नजर में यह द्विगु लग सकता है। द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध होता है, जैसे नवरत्न अर्थात नौ रत्नों का समूह।
Step 2: देखिए कि यहाँ समूह का बोध हो रहा है या नहीं।
‘पंचानन’ से पाँच मुखों का कोई समूह नहीं समझा जाता। इससे तो एक ऐसे व्यक्ति का बोध होता है जिसके पाँच मुख हैं।
Step 3: विग्रह लिखकर कसौटी लगाइए।
विग्रह बनता है –
पाँच हैं आनन जिसके, वह अर्थात शिव।
‘जिसके’ और ‘वह’ दोनों आ गए, यही बहुव्रीहि की पक्की पहचान है।
Step 4: इसी तरह के उदाहरण देखिए।
दशानन अर्थात दस हैं आनन जिसके, वह रावण। चतुर्भुज अर्थात चार हैं भुजाएँ जिसकी, वह विष्णु। इन सबमें तीसरा अर्थ प्रधान है।
Final Answer: यह
बहुव्रीहि समास है, क्योंकि इसका विग्रह है – पाँच हैं आनन जिसके, वह शिव।