Concept:
- किसी सुविधा पर अनुच्छेद लिखते समय संतुलन आवश्यक है, अर्थात लाभ भी और सावधानी भी।
- संकेत-बिंदु स्वयं यही संतुलन माँग रहे हैं, इसलिए तीनों को बराबर स्थान दीजिए।
Step 1: पहले बताइए कि क्या बदला।
पहले हर काम के लिए नकद चाहिए था, बैंक की कतार में लगना पड़ता था और खुले पैसे की समस्या रहती थी। अब मोबाइल से ही सब कुछ हो जाता है।
यह तुलना बदलाव को स्पष्ट कर देती है।
Step 2: फिर बताइए कि देश को क्या मिला।
हर लेनदेन का लेखा-जोखा बनने से पारदर्शिता आई और कर-चोरी घटी। छोटे व्यापारी भी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े, जिससे उन्हें ऋण मिलना आसान हुआ।
Step 3: अब दूसरा पहलू रखिए।
ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक और ओटीपी माँगने वाले फोन कॉल इसी सुविधा के साथ आए हैं। इनसे अनेक लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है।
Step 4: व्यावहारिक सुझाव देकर समाप्त कीजिए।
किसी को पिन या ओटीपी न बताएँ, केवल विश्वसनीय ऐप का प्रयोग करें और सार्वजनिक वाई-फाई पर भुगतान न करें। इससे अनुच्छेद उपयोगी बन जाता है।
Final Answer:
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा
कुछ वर्ष पहले तक हर छोटी खरीद के लिए नकद आवश्यक था और बैंक में लंबी कतारें लगती थीं। आज मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करते ही भुगतान पूरा हो जाता है। यह भुगतान का बिलकुल नया तरीका है, जिसमें न खुले पैसे की समस्या है और न समय की बरबादी। देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी यह सहायक है, क्योंकि हर लेनदेन का रिकॉर्ड बनने से पारदर्शिता बढ़ती है, कर-चोरी घटती है और छोटे दुकानदार भी बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ जाते हैं। किंतु इसके साथ सावधानी अपेक्षित है। ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसलिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपना पिन या ओटीपी किसी को न बताएँ और सार्वजनिक वाई-फाई से भुगतान करने से बचें। सतर्क रहकर प्रयोग करने पर यह सुविधा जीवन को बहुत सरल बना देती है।