Concept:
- लघुकथा लिखने का सरल ढाँचा है – वातावरण, घटना, निर्णय, और अंत में प्रभाव।
- इसी क्रम में चलने से कथा छोटी भी रहती है और पूरी भी लगती है।
Step 1: वातावरण, जो पहले से दिया गया है।
जाड़े की शाम, घना कोहरा, सूनी सड़क और अकेला लौटता पात्र। इसे ज्यों का त्यों रखिए और एक-दो वाक्य से थोड़ा और गहरा कर दीजिए।
Step 2: घटना, जो कथा को मोड़ दे।
कोहरे में कुछ ऐसा दिखे जो पात्र को रुकने पर मजबूर कर दे। जैसे सड़क किनारे रोता हुआ एक छोटा बच्चा।
Step 3: निर्णय, जहाँ पात्र का चरित्र खुलता है।
यहाँ भीतर का द्वंद्व दिखाइए, कि आगे बढ़ जाऊँ या रुकूँ। यही द्वंद्व कथा में जान डालता है।
Step 4: प्रभाव, अर्थात कथा का संदेश।
अंत में एक पंक्ति ऐसी हो जो घटना से आगे बढ़कर कोई बड़ी बात कह दे।
Final Answer:
शीर्षक : घर का रास्ता
जाड़े की शाम थी। आज रोज़ की तुलना में कोहरा अधिक ही घना था। मैं अपनी नृत्य-कक्षा से लौट रहा था। अचानक किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखा तो एक छह-सात साल का बच्चा सिकुड़ा बैठा था। वह रास्ता भूल गया था और डर के मारे काँप रहा था। घड़ी देखी, देर हो चुकी थी। एक क्षण मन डगमगाया, फिर मैंने उसका हाथ थाम लिया। पूछते-पूछते हम उसके घर पहुँचे। दरवाजा खुला और उसकी माँ ने उसे सीने से लगा लिया। लौटते हुए कोहरा उतना ही घना था, पर रास्ता मुझे पहले से कहीं अधिक साफ लग रहा था।