Question:medium

अपठित गद्यांश: जीवन की अनन्तता का प्रतीक ...... वह झरना उन अद्भुत ....., अनूठे क्षणों में मुझमें जीवन की शक्ति का अहसास हो रहा था। इस कदर प्रतीत हुआ कि जैसे मैं स्वयं भी देश और काल की सीमाओं से दूर बहती धारा में बहने लगा हूँ। भीतर की सारी तामसिकताएँ और दुष्ट वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह गईं। मन हुआ कि ऐसे ही अनन्त समय तक बहता रहूँ ...... सुनता रहूँ झरने की पुकार को।
(iii) रेखांकित अंश का भाव स्पष्ट कीजिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: संदर्भ:
लेखक झरने के सामने खड़ा है और उसकी अनन्त धारा में स्वयं को बहता हुआ अनुभव कर रहा है। यह अंश उसी अनुभव का परिणाम बताता है।

चरण 2: अंश की व्याख्या:
जैसे साफ पानी मैल को बहा ले जाता है, वैसे ही झरने की निर्मल धारा ने लेखक के मन का अंधकार और विकार बहा दिए। लोभ, क्रोध और बुरी इच्छाएँ उसके भीतर से दूर हो गईं।

चरण 3: भाव:
प्रकृति के बीच पहुँचकर मन शुद्ध और हल्का हो जाता है।

निष्कर्ष:
अंश का भाव यह है कि प्रकृति की पवित्रता से मन की सारी मलिनता धुल जाती है।
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