Question:medium

अपठित गद्यांश: हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का ह्रास तो हो ही रहा है, हम लक्ष्य भ्रम से भी पीड़ित हैं। विकास के विराट उद्देश्य से पीछे हट रहे हैं, हम झूठी तुष्टि के तात्कालिक लक्ष्यों का पीछा कर रहे हैं। मर्यादायें टूट रही हैं। नैतिक मानदण्ड ढीले पड़ रहे हैं। व्यक्ति केन्द्रिकता बढ़ रही है। स्वार्थ परमार्थ पर हावी हो रहा है। भोग की आकांक्षाएँ आसमान को छू रही हैं। उपभोक्ता संस्कृति हमारी सामाजिक नींव को हिला रही है।
(iii) हम लक्ष्य भ्रम से पीड़ित क्यों हैं?

Updated On: Sep 24, 2026
Show Solution

Solution and Explanation

चरण 1: संबंधित पंक्ति खोजें:
गद्यांश की दूसरी पंक्ति में कहा गया है कि हम लक्ष्य भ्रम से भी पीड़ित हैं। उसी के आगे इसका कारण दिया है।

चरण 2: उत्तर लिखें:
हमारे सामने विकास का बड़ा उद्देश्य है, पर हम उससे हट गए हैं। हम ऐसे छोटे लक्ष्यों में उलझ गए हैं जो तुरंत और झूठा संतोष देते हैं। सुख की इसी दौड़ में मर्यादाएँ टूट रही हैं और नैतिकता कमजोर हो रही है।

निष्कर्ष:
तात्कालिक सुख वाले लक्ष्यों के पीछे भागने और विकास के सच्चे उद्देश्य को भुला देने के कारण हम लक्ष्य भ्रम से पीड़ित हैं।
Was this answer helpful?
0