Question:medium

अपठित गद्यांश: जीवन की अनन्तता का प्रतीक ...... वह झरना उन अद्भुत ....., अनूठे क्षणों में मुझमें जीवन की शक्ति का अहसास हो रहा था। इस कदर प्रतीत हुआ कि जैसे मैं स्वयं भी देश और काल की सीमाओं से दूर बहती धारा में बहने लगा हूँ। भीतर की सारी तामसिकताएँ और दुष्ट वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह गईं। मन हुआ कि ऐसे ही अनन्त समय तक बहता रहूँ ...... सुनता रहूँ झरने की पुकार को।
(ii) प्रकृति के उस अनन्त स्वरूप को देखकर लेखक को कैसी अनुभूति होती है?

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: प्रश्न का उत्तर बिंदुओं में:
1. लेखक को जीवन की शक्ति का बोध होता है।
2. वह स्वयं को समय और स्थान की सीमा से परे बहता हुआ अनुभव करता है।
3. उसके मन की मलिनता समाप्त हो जाती है।
4. वह चाहता है कि अनन्त समय तक बहता रहे और झरने की पुकार सुनता रहे।

चरण 2: सार:
प्रकृति के अनन्त स्वरूप के सामने आकर लेखक का मन विशाल, निर्मल और आनंदित हो जाता है।

निष्कर्ष:
उसे आत्मिक शक्ति, पवित्रता और गहरी शांति की अनुभूति होती है।
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