अपठित गद्यांश: जीवन की अनन्तता का प्रतीक ...... वह झरना उन अद्भुत ....., अनूठे क्षणों में मुझमें जीवन की शक्ति का अहसास हो रहा था। इस कदर प्रतीत हुआ कि जैसे मैं स्वयं भी देश और काल की सीमाओं से दूर बहती धारा में बहने लगा हूँ। भीतर की सारी तामसिकताएँ और दुष्ट वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह गईं। मन हुआ कि ऐसे ही अनन्त समय तक बहता रहूँ ...... सुनता रहूँ झरने की पुकार को।
(ii) प्रकृति के उस अनन्त स्वरूप को देखकर लेखक को कैसी अनुभूति होती है?