Question:easy

अपठित गद्यांश: शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों के विकास के लिए अनिवार्य है। अज्ञान के अंधकार में जीना तो मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी है। ज्ञान के प्रकाश में ही जीवन के रहस्य खुलते हैं और हमें अपनी पहिचान मिलती है। शिक्षा मनुष्य को मष्तिष्क और देह का उचित प्रयोग करना सिखाती है। वह शिक्षा जो मानव को पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के अतिरिक्त कुछ गंभीर चिन्तन न दे व्यर्थ है। यदि हमारी शिक्षा सुसंस्कृत, सभ्य, सच्चरित्र एवं अच्छे नागरिक नहीं बना सकती तो उससे क्या लाभ? संसार के सभी वैभव व सुख साधन भी मनुष्य को तब तक सुखी नहीं बना सकते जब तक कि मनुष्य को आत्मिक ज्ञान न हो।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

Updated On: Sep 24, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: बार-बार आने वाला विषय:
गद्यांश में शिक्षा, ज्ञान, अज्ञान और आत्मिक ज्ञान जैसे शब्द बार-बार आए हैं। लेखक का जोर इस पर है कि सच्ची शिक्षा से चरित्र और सोच दोनों बनते हैं।

चरण 2: उपयुक्त नाम:
इन सभी बातों को एक वाक्यांश में समेटने पर ‘शिक्षा की उपयोगिता’ सबसे ठीक शीर्षक बनता है। ‘ज्ञान का प्रकाश’ भी चल सकता है।

अंतिम उत्तर:
शीर्षक: शिक्षा की उपयोगिता।
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