अपठित गद्यांश: आज के अनेक आर्थिक और सामाजिक विधानों की हम जाँच करें तो पता चलेगा कि वे हमारी सांस्कृतिक चेतना के क्षीण होने के कारण युगानुकूल परिवर्तन की कमी से बनी हुई रूढ़ियों के साथ संघर्ष की परिस्थिति से उत्पन्न माँग को पूरा करने के लिये अपनाये गये उपाय या अन्य द्वारा थोपी गई या उनका अनुकरण का स्वीकार की गई व्यवस्थाएँ मात्र है। भारतीय संस्कृति के नाम पर उन्हें जिन्दा रखा जा सकता है।
(i) युगानुरूप परिवर्तन एवं विकास न होने का क्या कारण है?