Comprehension

निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, जरा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों। 
नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं। 
ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।

Question: 1

लेखक के अनुसार नवाब साहब की आँखों में असंतोष का भाव क्यों दिखाई दे रहा था? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने के कारण
II. कहानी के लिए उपयुक्त कथानक नहीं मिलने के कारण
III. खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने के कारण

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गद्यांश आधारित प्रश्नों में, लेखक के अनुमान और वास्तविक घटना के बीच का अंतर समझें। यहाँ प्रश्न लेखक के अनुमान के बारे में है।
Updated On: Mar 7, 2026
  • I, II और III तीनों सही हैं।
  • I, II और III तीनों ग़लत हैं।
  • I और II दोनों सही हैं।
  • I और III दोनों सही हैं।
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

लेखक के अनुसार नवाब साहब की आँखों में असंतोष का भाव क्यों दिखाई दे रहा था? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने के कारण
II. कहानी के लिए उपयुक्त कथानक नहीं मिलने के कारण
III. खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने के कारण

सही उत्तर: I और III दोनों सही हैं।

1. नवाब साहब की स्थिति और असंतोष:
नवाब साहब की आँखों में असंतोष का भाव उनके मानसिक और भावनात्मक स्थिति को दर्शाता है। यह असंतोष उनकी व्यक्तिगत जीवन की असंतोषजनक स्थितियों और उनके द्वारा अनुभव की गई निराशा से उत्पन्न हुआ था।

2. एकांत चिंतन में विघ्न का प्रभाव:
नवाब साहब को एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने का मतलब यह है कि उनका मानसिक शांति भंग हो गया था। वे अपने विचारों में डूबे हुए थे, और अचानक कोई बाहरी विघ्न, जो उनके आत्म चिंतन को बाधित कर रहा था, ने उन्हें असंतुष्ट और मानसिक अशांति में डाल दिया। ऐसे समय में, जब कोई व्यक्ति गहरे चिंतन में होता है, तो किसी बाहरी तत्व का हस्तक्षेप उसे मानसिक रूप से असंतुष्ट और परेशान कर सकता है। यह असंतोष उनकी आँखों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।

3. खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने का प्रभाव:
दूसरे कारण के तहत, नवाब साहब की आँखों में असंतोष का कारण यह था कि वे खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जा रहे थे। नवाब साहब का सामाजिक और मानसिक स्तर ऊँचा था, और इस प्रकार की साधारण वस्तु के साथ उन्हें देखा जाना उनके आत्मसम्मान और प्रतिष्ठा के खिलाफ था। यह उनकी स्थिति और सम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा था, जिससे उनकी आँखों में असंतोष की भावना प्रकट हुई।

4. निष्कर्ष:
नवाब साहब का असंतोष उनके विचारों में विघ्न पड़ने और अपनी स्थिति को घटित होते देख कर उत्पन्न हुआ। एक ओर जहां उनका मानसिक शांति भंग हुआ, वहीं दूसरी ओर उन्हें खीरे जैसी सामान्य वस्तु के साथ देखा जाना भी उनके मानसिक संतुलन को प्रभावित कर रहा था। इस प्रकार, I और III दोनों कारण मिलकर उनके असंतोष का कारण बने। यह उनकी मानसिक और सामाजिक स्थिति को बेहतर ढंग से दर्शाता है।

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Question: 2

नवाब साहब के व्यवहार से उनकी किस प्रवृत्ति का परिचय मिलता है?

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पात्रों के व्यवहार का विश्लेषण करते समय उनके कार्यों और संवादों के पीछे छिपे इरादों को समझने का प्रयास करें।
Updated On: Mar 7, 2026
  • सादगी और सहजता
  • मित्रवत व्यवहार और अपनापन
  • अपरिचितों पर संदेह
  • दिखावा और संकोच
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

नवाब साहब के व्यवहार से उनकी किस प्रवृत्ति का परिचय मिलता है?
नवाब साहब के व्यवहार से उनकी प्रवृत्ति:
नवाब साहब के व्यवहार से दिखावा और संकोच की प्रवृत्तियों का परिचय मिलता है। उनका व्यवहार इस बात को दर्शाता है कि वे समाज में अपनी स्थिति और सम्मान को बनाए रखने के लिए कुछ बातें और क्रियाएँ करते थे। वे चाहते थे कि लोग उन्हें एक सम्मानित व्यक्ति के रूप में देखें और उनके आस-पास का वातावरण उनके उच्च सामाजिक स्तर को दर्शाए।

1. दिखावा:
नवाब साहब का दिखावा उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रति एक आंतरिक आवश्यकता को दर्शाता है। वे अपनी उच्च स्थिति और मान-सम्मान को बनाए रखने के लिए अपनी स्थिति को अधिक शानदार और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते थे। इस कारण से, उन्होंने अपने कार्यों, कपड़े और सामाजिक गतिविधियों में दिखावे का सहारा लिया।

2. संकोच:
उनके व्यवहार में संकोच भी स्पष्ट रूप से देखा गया है। संकोच की प्रवृत्ति तब प्रकट होती है जब किसी व्यक्ति को अपने सामाजिक या व्यक्तिगत व्यवहार के बारे में संदेह या डर होता है। नवाब साहब अपनी स्थिति और प्रतिष्ठा को लेकर असुरक्षित महसूस करते थे और उनके व्यवहार में यह संकोच और आत्म-संकोच दिखता था।

3. निष्कर्ष:
नवाब साहब के व्यवहार से यह स्पष्ट होता है कि वे समाज में अपनी उच्च स्थिति और सम्मान को बनाए रखने के लिए दिखावे और संकोच की प्रवृत्तियों का पालन करते थे। ये प्रवृत्तियाँ उनके मानसिक तनाव और सामाजिक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं।

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Question: 3

प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं?

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किसी कहानी में कथावाचक (लेखक) के विचारों और टिप्पणियों पर ध्यान दें, इनसे उनके व्यक्तित्व का पता चलता है।
Updated On: Mar 7, 2026
  • आक्रामक और क्रोधी
  • उदासीन और तटस्थ
  • निराश और क्षुब्ध
  • आलोचनात्मक और कल्पनाशील
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The Correct Option is D

Solution and Explanation

प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं?
लेखक के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के व्यक्तित्व की आलोचनात्मक और कल्पनाशील विशेषताएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। इन विशेषताओं के माध्यम से लेखक अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं और समाज या किसी घटना पर गहरी सोच और विश्लेषण करते हैं।

1. आलोचनात्मक विशेषता:
लेखक की आलोचनात्मक विशेषता उनके विचारों के गहरे विश्लेषण में देखी जाती है। वे घटनाओं, व्यक्तियों या समाज को गहराई से देखते हैं और उनके पक्ष और विपक्ष दोनों का विश्लेषण करते हैं। उनका आलोचनात्मक दृष्टिकोण उन्हें किसी भी विषय पर अपनी राय स्पष्ट और सटीक रूप से व्यक्त करने की क्षमता देता है। वे सिर्फ बाहरी रूप से चीज़ों को नहीं देखते, बल्कि उनके पीछे की सोच और उद्देश्य को समझने की कोशिश करते हैं।

2. कल्पनाशील विशेषता:
लेखक की कल्पनाशीलता उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से दिखती है। वे न केवल वास्तविकता का उल्लेख करते हैं, बल्कि अपने विचारों में कल्पना का भी समावेश करते हैं। यह विशेषता उनके लेखन में नए दृष्टिकोण, विचार और विचारशीलता को जन्म देती है। लेखक अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से पाठकों को नए विचारों की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं और समाज या जीवन के विभिन्न पहलुओं पर सोचने का अवसर प्रदान करते हैं।

3. निष्कर्ष:
इस प्रकार, लेखक के व्यक्तित्व की आलोचनात्मक और कल्पनाशील विशेषताएँ उनके लेखन में दिखाई देती हैं। ये दोनों विशेषताएँ उन्हें समाज में विचारशील और प्रभावशाली लेखक के रूप में स्थापित करती हैं। आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ-साथ उनकी कल्पनाशीलता उन्हें विचारों की गहराई और नयापन प्रदान करती है, जो उनके लेखन को अद्वितीय और आकर्षक बनाती है।

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Question: 4

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : लेखक ने नवाब साहब से अपनी नज़रें चुरा लीं और दूसरी ओर देखने लगा।
कारण : नवाब साहब के व्यवहार के कारण अपने आत्मसम्मान को निबाहने के लिए उसने ऐसा किया।

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कथन और कारण वाले प्रश्नों में, कारण वाले वाक्य से पहले 'क्योंकि' लगाकर देखें। यदि "कथन, क्योंकि कारण" एक तार्किक वाक्य बनता है, तो कारण सही व्याख्या करता है।
Updated On: Mar 7, 2026
  • कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
  • कथन सही है, किंतु कारण ग़लत है।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।
  • कथन और कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की उचित व्याख्या नहीं करता है।
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The Correct Option is C

Solution and Explanation

निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : लेखक ने नवाब साहब से अपनी नज़रें चुरा लीं और दूसरी ओर देखने लगा।
कारण : नवाब साहब के व्यवहार के कारण अपने आत्मसम्मान को निबाहने के लिए उसने ऐसा किया।

सही उत्तर: कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की उचित व्याख्या करता है।

1. कथन की व्याख्या:
लेखक ने नवाब साहब से अपनी नज़रें चुरा लीं और दूसरी ओर देखने लगा, यह संकेत करता है कि वह नवाब साहब के सामने अपनी स्थिति और सम्मान को बनाए रखने के लिए आत्मसंबंधी स्थिति में था। किसी के सामने नज़रें चुराना एक प्रकार से अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने का एक तरीका हो सकता है, खासकर तब जब व्यक्ति सामने वाले से असहज महसूस करता हो।

2. कारण की व्याख्या:
कारण यह बताता है कि लेखक ने अपने आत्मसम्मान को निबाहने के लिए ऐसा किया। यह संकेत करता है कि नवाब साहब के व्यवहार ने लेखक को असहज कर दिया था, जिससे उसने अपनी नज़रों को चुराना और दूसरी ओर देखना बेहतर समझा। यह व्यवहार उन सामाजिक मानकों को बनाए रखने की कोशिश को दर्शाता है, जो व्यक्ति अपनी गरिमा और सम्मान के लिए बनाता है।

3. निष्कर्ष:
इस प्रकार, कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण पूरी तरह से कथन की व्याख्या करता है। नवाब साहब के व्यवहार ने लेखक को इस स्थिति में डाल दिया कि उसे अपनी आत्मसम्मान की रक्षा करने के लिए नज़रें चुरानी पड़ीं। यह व्यवहार एक मानसिक स्थिति और सामाजिक दबाव को दर्शाता है।

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Question: 5

'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' से क्या अभिप्राय है?

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मुहावरों और वाक्यांशों का अर्थ उनके संदर्भ के अनुसार समझें। यहाँ 'आत्मसम्मान' शब्द ही सही उत्तर की ओर संकेत कर रहा है।
Updated On: Mar 7, 2026
  • स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए आँखें हटाना
  • स्वयं के संतोष के लिए दृष्टि हटाना
  • आत्मा के सम्मान के लिए आँखें झुकाना
  • सामने वाले के सम्मान के लिए आँखें झुकाना
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The Correct Option is A

Solution and Explanation

'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' से क्या अभिप्राय है?
आत्मसम्मान में आँखें चुराना का अभिप्राय:
'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' का अर्थ है स्वाभिमान या आत्म-सम्मान के कारण अपनी नज़रों को हटाना या नज़रें चुराना। यह तब होता है जब कोई व्यक्ति अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए किसी अन्य व्यक्ति या स्थिति से असहज महसूस करता है और इस कारण से वह अपनी नज़रें किसी अन्य दिशा में मोड़ देता है। यह क्रिया एक मानसिक स्थिति को दर्शाती है जहाँ व्यक्ति अपनी गरिमा बनाए रखने के लिए सामने वाले से संपर्क बनाने से बचता है। यह एक प्रकार की सामाजिक शिष्टाचार या आत्मसंयम की स्थिति है।

1. आत्मसम्मान की रक्षा:
यह संकेत करता है कि व्यक्ति अपनी इज्जत और सम्मान को बनाए रखने के लिए स्थिति से बचने की कोशिश करता है। कभी-कभी, यह स्थिति इतनी असहज हो सकती है कि व्यक्ति सीधे तौर पर नज़रें नहीं मिला पाता और वह अपनी नज़रों को दूसरी दिशा में मोड़ लेता है। यह आत्मसम्मान की रक्षा करने का एक तरीका है, जब सामने वाला व्यक्ति उसके लिए सम्मानजनक नहीं होता।

2. निष्कर्ष:
'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' एक संवेदनशील स्थिति का प्रतीक है, जिसमें व्यक्ति अपनी गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए अपनी नज़रें हटा लेता है। यह एक सामाजिक और मानसिक स्थिति को दर्शाता है जो व्यक्ति की आत्म-संवेदनशीलता और आत्म-सम्मान की रक्षा का प्रतीक है।

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Top Questions on गद्यांश पर आधारित प्रश्न