विश्लेषण: हिंदी साहित्य के इतिहास में ‘भारतेन्दु युग’ को आधुनिक हिंदी साहित्य का प्रारंभिक काल माना जाता है।
इस युग का नाम हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चंद्र के नाम पर रखा गया है, क्योंकि उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य को नई दिशा प्रदान की।
इस काल में हिंदी गद्य और पद्य दोनों का तीव्र विकास हुआ। पत्रकारिता, नाटक, निबंध, उपन्यास तथा सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना से संबंधित साहित्य की रचना बड़े स्तर पर की गई।
इस युग की प्रमुख विशेषताएँ राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सुधार, आधुनिकता की भावना तथा जनजागरण थीं।
लेखकों ने समाज की कुरीतियों, अंधविश्वासों और राजनीतिक परिस्थितियों पर खुलकर लेखन किया।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र के नेतृत्व में हिंदी साहित्य में नई चेतना का संचार हुआ, जिसके कारण इस काल को उनके नाम से जाना जाने लगा।
साहित्य में खड़ी बोली हिंदी को प्रतिष्ठा मिली और आधुनिक गद्य की मजबूत नींव रखी गई।
निष्कर्ष: उपर्युक्त ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ‘भारतेन्दु युग’ की समयावधि सन् 1868 से 1900 ई० तक मानी जाती है।