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‘अपना मालवा..... ’ पाठ में किन ‘सदानीरा’ नदियों का उल्लेख है ? वर्तमान में उनकी दशा कैसी है ? इस स्थिति के कारणों का उल्लेख कीजिए। 
 

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भौगोलिक समस्याओं से जुड़े प्रश्नों में कारण, प्रभाव और समाधान तीनों पक्षों को स्पष्ट करना आवश्यक होता है।
Updated On: Jan 14, 2026
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Solution and Explanation

'अपना मालवा' पाठ में, लेखक ने मालवा क्षेत्र की उन नदियों का वर्णन किया है जो कभी 'सदानीरा' के नाम से जानी जाती थीं, यानी वे नदियाँ जो पूरे साल बहती थीं। इनमें मुख्य रूप से चंबल, कालीसिंध, पार्वती और गंभीर जैसी नदियाँ शामिल हैं।
ये नदियाँ सिर्फ पानी का स्रोत नहीं थीं, बल्कि क्षेत्र की जीवनरेखा थीं – इनसे सिंचाई होती थी, पानी की आपूर्ति होती थी और जैव विविधता भी इन्हीं पर निर्भर थी।
लेकिन, वर्तमान में इन नदियों की स्थिति गंभीर है। गर्मी में ये सूख जाती हैं, जल प्रवाह कम हो गया है, जल स्तर घट गया है और प्रदूषण बढ़ रहा है।
इसके मुख्य कारण हैं – अत्यधिक जल का उपयोग, औद्योगिक कचरा, अवैज्ञानिक खेती, वनों की कटाई और जल संरक्षण योजनाओं की कमी।
अगर यही स्थिति रही तो, 'सदानीरा' कहलाने वाली ये नदियाँ भविष्य में केवल किताबों में ही रह जाएंगी। जल ही जीवन है – इसका संरक्षण ज़रूरी है।
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