Question:medium

काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए :

भादों के बीत जाने पर प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने ‘पतंग’ कविता में दिखाया है उसका वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

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भादों के बाद आने वाली शरद ऋतु के मानवीकरण पर ध्यान दीजिए। सवेरे, आकाश और बच्चों के चित्रों को जोड़िए।
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Solution and Explanation

चरण 1: ऋतु-परिवर्तन का आधार:
भादों वर्षा ऋतु का महीना है, जिसमें तेज़ बारिश होती है और आकाश बादलों से ढका रहता है।
आलोक धन्वा ‘पतंग’ कविता में दिखाते हैं कि भादों के जाते ही शरद ऋतु आती है और प्रकृति का रूप बदल जाता है।

चरण 2: मानवीकरण द्वारा शरद का चित्र:
कवि ने शरद ऋतु का मानवीकरण किया है।
शरद एक उत्साही बालक की तरह नई चमकीली साइकिल पर सवार होकर, पुल पार करता और घंटी बजाता हुआ आता है।
वह अपने चमकीले इशारों से बच्चों को पतंग उड़ाने के लिए पुकारता है।

चरण 3: प्रकृति का नया रूप:
बादल छँट जाते हैं, सुबह खरगोश की आँखों की तरह लाल और उजली हो जाती है।
आकाश इतना कोमल और साफ़ हो जाता है कि पतंगें आसानी से ऊँचाई तक उड़ सकें।
इस प्रकार पूरा वातावरण बच्चों की उमंग और खेल के अनुकूल बन जाता है।

अंतिम उत्तर:
भादों के बाद बरसात रुक जाती है, उजला लाल सवेरा आता है, शरद बच्चे की तरह साइकिल पर आकर पतंगबाज़ बच्चों को बुलाता है और आकाश साफ़-मुलायम होकर पतंगों के लिए तैयार हो जाता है।
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