अपठित गद्यांश: आजाद भारत में दुर्गा भाभी को उपेक्षा और सम्मान दोनों प्राप्त हुए। सरकारों ने उन्हें पैसों से तौलना चाहा। कतिपय वर्ष पूर्व उनके सम्मान में आयोजित एक समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें 51 हजार रूपये भेंट किए। भाभी ने वे रूपए वहीं वापस कर दिए। उन्होंने कहा कि “जब हम स्वाधीनता के लिए संग्राम कर रहे थे, उस समय किसी व्यक्तिगत लाभ की आकांक्षा नहीं थी, केवल स्वाधीनता प्राप्ति लक्ष्य था। इस धन से यहाँ शहीदों का एक बड़ा स्मारक बनाया जाय।”
(ii) स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने का लक्ष्य क्या था?