Question:medium

निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए :

‘नए और अप्रत्याशित विषयों पर लेखन’ पाठ में लेखन कर्म को खुले मैदान में दौड़ लगाने, कुलाँचे भरने की तरह क्यों कहा गया है ? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

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पाठ में विषय को ‘दो खंभों के बीच बँधी रस्सी’ नहीं, ‘खुला मैदान’ कहा गया है, जहाँ सार्थक विचारों को खुलकर व्यक्त करने की छूट होती है।
Updated On: Oct 27, 2026
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Solution and Explanation

चरण 1: दो चित्रों की तुलना :
पाठ में दो चित्र रखे गए हैं। एक, दो खंभों के बीच बँधी रस्सी, जिस पर चलने वाला ज़रा भी इधर-उधर नहीं हो सकता। दूसरा, खुला मैदान, जिसमें कोई भी बेलाग दौड़ सकता है, कूद सकता है और कुलाँचे भर सकता है। अप्रत्याशित विषय पर लेखन दूसरे चित्र जैसा है।

चरण 2: ऐसा क्यों :
ऐसा विषय अचानक सामने आता है और उस पर लिखने का कोई बना-बनाया फ़ॉर्मूला नहीं होता। लेखक विषय पर कई कोणों से सोच सकता है, उनमें से किसी एक कोण को चुनकर आकर्षक शुरुआत कर सकता है और अपनी कल्पना, अनुभव तथा विचार के बल पर लेख को आगे बढ़ा सकता है। उस पर किसी एक विधा में लिखने का दबाव भी नहीं होता। पर उसे बातों को आपस में जोड़कर और तालमेल के साथ रखना होता है।

चरण 3: लगभग 40 शब्दों का उत्तर :
रस्सी पर चलने वाले की तरह लेखक यहाँ बँधा नहीं होता। वह विषय से जुड़े किसी भी सार्थक विचार को, किसी भी कोण से और किसी भी शैली में रख सकता है, बस बात सुसंबद्ध और सुसंगत रहे। इसी छूट के कारण इसे खुले मैदान में कुलाँचे भरने जैसा कहा गया है।

अंतिम उत्तर:
अप्रत्याशित विषयों पर लेखन में विचार और अभिव्यक्ति की खुली छूट होती है, इसलिए उसकी तुलना खुले मैदान की दौड़ से की गई है।
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