चरण 1: अंक-योजना देखना:
लघुकथा के 5 अंक इस तरह हैं: प्रस्तुति 1 अंक, विषयवस्तु 3 अंक और भाषा शुद्धता 1 अंक। कथा शीर्षक के साथ हो, दी गई पंक्ति से शुरू हो, एक ही घटना पर टिके और अंत में सीख दे।
चरण 2: कहानी की रूपरेखा बनाना:
आरंभ: दी हुई पंक्ति से, बस-अड्डे पर भीगती बूढ़ी अम्मा।
मोड़: छाता देना, बेटे का नंबर खोजकर उसे बुलाना।
अंत: आशीर्वाद और सहानुभूति की सीख।
चरण 3: दूसरी मॉडल लघुकथा:
छाते के नीचे इंसानियत
घनघोर बारिश हो रही थी और अचानक मैंने देखा कि बस-अड्डे के कोने में एक बूढ़ी अम्मा भीगती हुई अपना भारी थैला पकड़े खड़ी हैं। उनके पैर काँप रहे थे और आँखों में घबराहट थी। मैंने तुरंत अपना छाता उनके ऊपर किया और पूछा कि वे कहाँ जाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि बेटे का पता खो गया है। मैंने फ़ोन से उनके बेटे का नंबर खोजा और उसे बुलाया। कुछ देर में वह दौड़ता हुआ आया। अम्मा ने आशीर्वाद दिया तो मेरा मन भर आया। मुझे सीख मिली कि थोड़ी-सी सहानुभूति किसी के लिए बहुत बड़ी राहत बन सकती है।
चरण 4: भाषा और शब्द-संख्या की जाँच:
कथा में लगभग 101 शब्द हैं। पहली पंक्ति वही है जो प्रश्न में दी गई थी, उसके बाद घटना आगे बढ़ती है और अंत में एक सीख है। संवाद और वर्णन सरल हैं। वर्तनी और विराम-चिह्न जाँच लेने चाहिए।
चरण 5: अंतिम उत्तर:
उत्तर: दी गई पंक्ति से शुरू होने वाली लगभग 101 शब्दों की दूसरी लघुकथा ऊपर दी गई है।