चरण 1: प्रश्न क्या माँगता है:
प्रश्न अनौपचारिक पत्र लिखने को कहता है। पहले तय करें कि पत्र किसे जा रहा है। उसी से संबोधन, अभिवादन और समापन की भाषा तय होती है। फिर देखें कि कौन-सी बातें लिखनी ज़रूरी हैं और शब्द-सीमा लगभग 100 शब्द है।
चरण 2: पत्र की रूपरेखा:
सबसे ऊपर प्रेषक का पता और दिनांक रखें। फिर संबोधन और अभिवादन लिखें। उसके बाद एक छोटे-से अनुच्छेद में सारी बातें समेटें। अंत में आभार, सद्भाव या आशा का वाक्य और नाम लिखें।
जानकारी: माँ की चिट्ठी से पता चला कि वह चिढ़कर रूखा बोलता है; मन उदास हुआ।
समझाना: कड़वे शब्द चुभते हैं और पछतावा देते हैं, जबकि मधुर वाणी से बिगड़े काम बनते हैं; संयमी व्यक्ति आदर पाता है।
उपाय: गुस्से में एक से दस तक गिनना, शांत होकर उत्तर देना और बदलाव का विश्वास।
चरण 3: दूसरा आदर्श उत्तर:
प्रेषक: रेवा, ए-14, गांधी कॉलोनी, जयपुर - 302001
दिनांक: 10 मार्च, 2027
प्रिय छोटे भाई,
सस्नेह आशीर्वाद।
अभी माँ की चिट्ठी मिली। उन्होंने लिखा है कि तुम बात-बात पर चिढ़ जाते हो और सबसे रूखे ढंग से बोलते हो। पढ़कर मन उदास हो गया। याद रखो, कड़वे शब्द तीर की तरह चुभते हैं और बाद में पछतावा देते हैं। मधुर वाणी से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। संयम रखने वाला व्यक्ति हर जगह आदर पाता है। जब ग़ुस्सा आए तो एक से दस तक गिनो और फिर शांत होकर जवाब दो। मुझे विश्वास है कि तुम धीरे-धीरे अपनी इस आदत को बदल लोगे।
घर में सबको नमस्ते कहना।
तुम्हारी बड़ी बहन,
रेवा
चरण 4: अंक कैसे मिलेंगे:
सही प्रारूप, यानी आरंभ और अंत की औपचारिकताएँ निभाने पर 1 अंक मिलता है। मुख्य भाग में तीनों बातें होने पर विषयवस्तु के 3 अंक मिलते हैं। शुद्ध भाषा, सही वर्तनी और उचित विराम-चिह्नों पर 1 अंक मिलता है।
उत्तर: ऊपर का दूसरा पत्र भी सही प्रारूप और विषयवस्तु वाला आदर्श उत्तर है।